रतनपुर दर्शन


सिद्ध शक्ति पीठ श्री महामाया देवी मंदिर बिलासपुर अंबिकापुर राज्य राजमार्ग के किनारे स्थित है, बिलासपुर से सिर्फ 25 किलोमीटर दूर है। निकटतम रेलवे स्टेशन बिलासपुर (दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे।) है दुर्भाग्य से, यह किसी भी अंतर या अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के साथ जुड़ा नहीं है। है, जो मुंबई, दिल्ली और नागपुर से जुड़ा है - (बिलासपुर से 130 किमी मन हवाई अड्डे) निकटतम हवाई अड्डा है, तो, रायपुर में है। हालांकि, भारतीय रेल के एक जोनल मुख्यालय होने के नाते, बिलासपुर उपयुक्त रूप से ट्रेन से भारत के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। बिलासपुर में ट्रेन उतरने के बाद, आप या तो बस या टैक्सी ले सकते हैं, कि आप रतनपुर के लिए सीधे ले जाएगा। टैक्सी मंदिर परिसर के अंदर ले जा सकते हैं, जो आधे से एक किलोमीटर राजमार्ग से ऑफसेट है।


श्री शिद्धि विनायक मंदिर रतनपुर


श्री शिद्धिविनायक मंदिर ,मंदिरों की नगरी रतनपुर के ऐतिहासिक भैरव बाबा मंदिर के पास स्थित है | जो की बिलासपुर से सिर्फ 24 किलोमीटर दूर है। निकटतम रेलवे स्टेशन बिलासपुर (दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे।) है

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राधा माधव धाम रतनपुर भीम चौक मे स्थित है जो की बिलासपुर से सिर्फ 25 किलोमीटर दूर है। निकटतम रेलवे स्टेशन बिलासपुर (दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे।) है | प्रसिद्ध मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर प्रति वर्ष पांच दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन भी होता है। जिसमें सुदूर ग्रामीण सहित पूरे छत्तीसगढ़ प्रांत से आए हुए विभिन्न कलाकारों के द्वारा अनेक धार्मिक एवं विविध कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं।


गिरजाबंध हनुमान मंदिर – रतनपुर


गिरजाबंध हनुमान मंदिर – बिलासपुर से 25 कि. मी. दूर एक स्थान है रतनपुर, इसे महामाया नगरी भी कहते हैं। रतनपुर के गिरिजाबंध में हनुमानजी का यह अनोखा मंदिर है। मंदिर को गिरजाबंध हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह देवस्थान धार्मिक दृष्टि से भारत में सबसे अलग माना जाता है। इसकी मुख्य वजह यहां स्थित मां महामाया देवी और गिरजाबंध में स्थित यह हनुमानजी का मंदिर है।

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छत्तीसगढ़ में एक मात्र लक्ष्मी का प्राचीन मंदिर इकबीरा पहाड़ी रतनपुर कोटा मार्ग पर स्थित है। धन वैभव, सुख, समृद्धि व ऐश्वर्य की देवी मां महालक्ष्मी का यह प्राचीन मंदिर हजारों-लाखों भक्तों के आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस मंदिर में पवित्र भाव से देवी की आराधना करने से दुख, दरिद्रय, रोग, शोक व त्रितापों का शमन होता है व जीवन में अनुकूलता प्राप्त होती है।
छत्तीसगढ़ की प्राचीन राजधानी कहे जाने वाले रतनपुर में सैकड़ों की संख्या में मंदिर विद्यमान हैं और इन सभी मंदिरों का अपना-अपना महत्व है। इन्हीं में से एक है देवी महालक्ष्मी का मंदिर। यह मंदिर लखनी देवी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। लखनी देवी शब्द लक्ष्मी का ही अपभ्रंश है, जो साधारण बोलचाल की भाषा में रूढ़ हो गया है, जिस पर्वत पर यह मंदिर स्थित है इसके भी कई नाम है। इसे इकबीरा पर्वत वाराह पर्वत, श्री पर्वत व लक्ष्मीधाम पर्वत के नाम से भी जाना जाता है।


गज किला रतनपुर


रतनपुर को शिव व शक्ति की नगरी के तौर पर जाना जाता है लेकिन यहां पर प्राचीन, ऐतिहासिक स्थापत्य कला की सुंदरता भी देखने को मिलती है। कई महल व प्राचीन मंदिर यहां के वैभव को बढ़ाते हैं। सालों साल बाद भी इसकी सुंदरता लोगों को आकर्षित करती है और इसको देखने के लिए देश के अलावा विदेशों से पर्यटक आते हैं। कल्चुरी राजाओं की स्थापत्य कला इसके हर एक कोने में नजर आती है।
पुराना बस स्टैण्ड के पास राष्ट्रीय राजमार्ग से लगा हुआ ऐतिहासिक किला हाथी अथवा गज किले के नाम से जाना जाता है। यह जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंच गया है। जिसे वर्तमान में पुराने स्थिति में लाने का प्रयास पुरातत्व विभाग कर रहा है। इसका देख रेख कर इसकी सुंदरता व प्राचीनता को संजोय रखने का प्रयास कर रहा है।

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खुटाघाट बांध हर पर्यटक के साथ प्रसिद्ध है। यह रतनपुर खंडहर के लिए मशहूर शहर से 12 किमी की दूरी पर स्थित है। खुटाघाट बांध खरून नदी के शांत किनारे पर एक बांध का निर्माण किया है और पूरे क्षेत्र की सिंचाई की प्रक्रिया में मदद करता है। अगर आप खुटाघाट बांध का भ्रमण करते है तो आप इसके बेदाग सुंदरता से मुग्ध हो जाएगा। और आसपास के जंगल और पहाड़ियों इस बांध के लिए एक अतिरिक्त आकर्षण का बढ़ावा है। और यह एक सुंदर पिकनिक स्थल है जहा हर साल हजारो पर्यटक आते है इस सुंदर दृश्य का दर्शन करने।

नवरात्रि कालभैरव दर्शन